हरिद्वार। वन प्रभाग हरिद्वार की श्यामपुर रेंज में अज्ञात वाहन की चपेट में आकर इस गुलदार की मौके पर ही मौत हो गई। गुलदार की मौत की खबर पर प्रभागीय वनाधिकारी टीम सहित मौके पर पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। श्यामपुर स्थित गाजीवाली में खैरा ढाबे के पास सोमवार सुबह सड़क पार करते समय एक नर गुलदार तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आ गया। यह हादसा इतनी तेजी से हुआ कि गुलदार को संभलने का मौका नहीं मिला और उसकी वाहन से कुचलकर मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों द्वारा मामले की जानकारी वन प्रभाग के अधिकारियों को दी गई। जिसके बाद प्रभागीय वनाधिकारी आकाश वर्मा टीम के साथ मौके पर पहुंचे। आकाश वर्मा ने बताया कि गुलदार की आयु करीब डेढ़ वर्ष है। गुलदार को टक्कर मारने वाले वाहन की रफ्तार इतनी तेज रही होगी कि गुलदार को संभलने तक का मौका नहीं मिला। गुलदार के शव का पोस्टमार्टम श्यामपुर रेंज के रेस्क्यू सेंटर में विभाग के चिकित्सकों द्वारा किया गया। जिसके बाद शव को जलाकर नष्ट कर दिया गया। उन्होने माना कि जिस तरह हाईवे पर गुलदार असमय मौत का शिकार हो रहे हैं वह चिंताजनक है। गुलदार की मौत के बाद हुए उसके पीएम की पूरी वीडियोग्राफी कराई गई है। विभाग द्वारा उस स्थान की भी वीडियोग्राफी कराई गई है जिस स्थान पर गुलदार अज्ञात वाहन का शिकार बना था। इस सड़क पर चलने वाले वाहनों की अधिक संख्या और तेज रफ्तार के कारण इस साल अबतक चार गुलदार मौत की नींद सो चुके हैं लेकिन फिर भी इस हाईवे पर वाहनों की गति को अबतक नियंत्रित नहीं किया जा सका है। वन्यजीव संरक्षण को लेकर दावे भले बड़े बड़े किये जाते हों लेकिन इसे लेकर जिम्मेदार विभाग कितने संजीदा हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल दर साल श्यामपुर से गुजरने वाले एनएच 74 पर जंगली जानवरों विशेष तौर पर गुलदारों की सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के बाद भी आजतक इन्हे रोकने के कोई संजीदा प्रयास नहीं किये जा रहे हैं।
हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा ...
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