हरिद्वार। महानगर व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सुनील सेठी ने जनता को गुलदार के आतंक निजात दिलाने के लिए कोई ठोस कार्यवाही न कर पाने वाले वनविभाग के गैर जिम्मेदार अधिकारियो को हरिद्वार जिले से हटाए जाने की मांग प्रदेश के मुख्यमंत्री से की है। इस संबंध में उन्होंने एक पत्र भी मुख्यमंत्री को प्रेषित किया है। सोमवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए सुनील सेठी ने कहा कि गुलदार के आतंक से जनता में भय का माहौल है। शिवालिक नगर, बीएचईएल, सुभाष नगर, टिबड़ी, बिलकेश्वर कालोनी, भीमगोडा, सत्यम विहार, भूपतवाला क्षेत्र की कालोनियां आदि कालोनियों में गुलदार दस्तक से लोग सहमे हुए हैं। कालोनियों में गुलदार की चहलकदमी के चलते शाम होते ही घरों से निकलना तक जोखिम भरा हो गया है। अभी 2 दिन पूर्व गुलदार एक व्यक्ति की जान भी ले चुका है। सभी जानकारी होने के बावजूद वन विभाग के अधिकारी खानापूर्ति करने तक सीमित है। वन विभाग के अधिकारियो की लापरवाही जनता पर भारी पड़ रही है। उन्होंने मांग की कि गैर जिम्मेदार वन अधिकारियों हरिद्वार जनपद से स्थानांतरित कर जिम्मेदार अधिकारियो को नियुक्त किया जाना चाहिए। ज्वालापुर व्यापार मंडल अध्यक्ष सामाजिक कार्यकर्ता विनय श्रोत्रिय ने कहा कि शिवालिक नगर, ज्वालापुर से सटी कालोनियों, डीपीएस स्कूल के पास तो सबसे ज्यादा बुरा हाल है। डीपीएस एवं भेल से सटे कई स्कूलों के आसपास गुलदार देखा जा चुका है। प्रैसवार्ता में ज्वालापुर इकाई के महामंत्री संजय मेहता, जिला उपाध्यक्ष जितेंद्र चैरसिया, जिला सचिव प्रीत कमल शर्मा, शहर अध्यक्ष तेज प्रकाश साहू, तरुण व्यास, राहुल चैहान, दीपक पांडेय, पंकज माटा, मनोज कुमार आदित्य, रमन सिंह, गणेश शर्मा, पंकज ममगाई आदि भी मौजूद रहे।
हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।
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