हरिद्वार। पूर्व पुलिस उपाधीक्षक प्रभुनाथ ओझा अब श्रीमहंत प्रज्ञानन्द गिरि बन गए है। प्रयागराज में कई कुम्भों और अद्र्वकुम्मों में महत्वपूर्ण पदों पर कुशलता पूर्वक डयूटी कर चुके प्रभुनाथ ओझा ने शुक्रवार को हरिद्वार में जूना अखाड़े में अन्र्तराष्टीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि महाराज से सन्यास की दीक्षा ली।उनकों दीक्षा के बाद प्रज्ञानन्द गिरि नाम दिया गया। श्रीमहंत हरिगिरि महाराज ने उन्हें वृन्दावन में जूना अखाड़े के सचिव पर पद नियुक्त किया है। जहां वे अखाड़े की सम्पत्ति व मन्दिरों की देखरेख करेंगे। सन्यास की समस्त प्रक्रिया पूर्ण करने के पश्चात जूना अखाड़े के आचार्य महामण्डलेश्वर अवधेशानन्द गिरि महाराज ने इनका विजयघोष किया तथा कान में मंत्र फूॅका। इस अवसर पर अखाड़े के राष्टीय सभापति श्रीमहंत प्रेमगिरि महाराज,पूर्व सभापति श्रीमहंत सोहन गिरि,सचिव श्रीमहंत महेश पुरी,कोठारी महंत लाल भारती ,कारोबारी महंत महादेवानन्द गिरि,थानापति महंत रणधीर गिरि,महंत विमल गिरि आदि उपस्थित थे।
हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा ...
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