हरिद्वार। जड़ी बूटी दिवस के रूप में मनाए जाने वाल पंतजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण के जन्म दिवस पर देश भर में गिलोए के एक लाख पौधे रोपे जाएंगे। पौधा रोपण अभियान को सफल बनाने के लिए पतंजलि योग समिति के मुख्य केन्द्रीय प्रभारी राकेश ने प्रदेश के चार जिलों हरिद्वार, रुड़की, ऋषिकेश, देहरादून इकाइयों की आॅनलाईन बैठक कर समस्त कार्यकर्ताओं को दिशानिर्देश दिए। बैठक में राज्य प्रभारी भास्कर औली, सीमा, प्रवीण आर्य, सुरेश, प्रभात आर्य, देशबन्धु आदि ने अपने-अपने सुझाव रखे। चारों जिला इकाइयों के लगभग 1,000 कार्यकर्ता गाँव-गाँव, गली-गली जाकर गिलोय के औषधीय गुणों के विषय में लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ निःशुल्क गिलोय के पौधे वितरित कर रहे हैं। पतंजलि योग समिति की मुख्य महिला केन्द्रीय प्रभारी साध्वी आचार्या देवप्रिया, मुख्य केन्द्रीय प्रभारी डा.जयदीप आर्य, राकेश, राहुल, प्रवीण आदि ने प्रेमनगर आश्रम चैक से सिंहद्वार तक सैकड़ों व्यक्तियों को गिलोय वितरित की। गिलोय प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत कर रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है। गिलाए में मौजूद एंटीआक्सीडेंट्स शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। साध्वी आचार्या देवप्रिया ने कहा कि विभिन्न अनुसंधानों से पता चला है कि गिलोय से इम्युनिटी बूस्ट होती है और कई बीमारियों व महामारियों से बचाव होता है। डा.जयदीप आर्य ने कहा कि गिलोय कोलेस्ट्रोल को कम करती है तथा रक्त में शुगर के स्तर का नियंत्रित करन में सहायता करती है। गिलाए त्रिदोष नाशक है। यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में भी सहायक है। इसके सेवन से आँत सम्बंधी समस्याएं दूर होती हैं।
हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा ...
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