हरिद्वार। अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद उत्तराखण्ड के प्रदेश में विस्तार हेतु संयोजक पंडित बालकृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने गढ़वाल मंडल के सभी जनपदों मेे सम्पर्क कर ब्राह्मणों को परिषद से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। प्रतिनिधि मंडल गढ़वाल ने के सभी जिलों के प्रमुख ब्राह्मणों से सम्पर्क करते हुए अन्तिम में गंगोत्री धाम में मुख्य पुजारी रावल शिव प्रकाश महाराज की अध्यक्षता में बैठक कर उत्तरकाशी जिला इकाई की घोषणा की। जिले की टीम में पं.संजीव सेमवाल जिला अध्यक्ष, पं.मुकेश सेमवाल जिला संयोजक, पं.सतीश सेमवाल जिला उपाध्यक्ष, पं.जगमोहन उनियाल जिला महामंत्री, पं.नवीन सेमवाल जिला संगठन मंत्री, पं.सम्पूर्णा उनियाल मीडिया प्रभारी, पं.हरीश नौटियाल, पं.गणेश सेमवाल युवा प्रकोष्ठ, पं.रमेश सेमवाल किसान प्रकोष्ठ एवं पं.सुमेश, पं.अवधेश, पं.शिवांश, पं.नीरज, पं.मयंक सेमवाल को जिला कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया है। इस मौके पर परिषद के प्रदेश संयोजक पं.बालकृष्ण शास्त्री ने कहा कि परिषद शुद्ध रूप से एक गैरराजनैतिक संगठन है जो ब्राह्मणों के हित में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि आज सभी प्रकार से भेद भाव को दूर करते हुए ब्राह्मणों को एक मंच पर आने की आवश्यकता है। मुख्य पुजारी रावल शिवप्रकाश महाराज ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनायें देते हुए कहा कि ब्राह्मण हमेशा सभी के कल्याण की ही बात करता है फिर भी आज कुछ लोगों को समझ में नहीं आ रहा है। अगर ब्राह्मण नहीं रहेगा तो एक दिन भारतीय संस्कृति भी नष्ट हो जायेगी। प्रदेश संयोजक पं.बालकृष्ण शास्त्री, हरिद्वार के जिलाध्यक्ष पं.विपिन कुमार शर्मा, जिला उपाध्यक्ष पं.युगल किशोर पाठक महामंत्री पं.विकास शर्मा एवं गढ़वाल मंडल के संयोजक पं. प्रदीप शर्मा ने नव नियुक्त पदाधिकारियों का माला एवं अंगवस्त्र द्वारा स्वागत किया।
हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा ...
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