हरिद्वार । आध्यात्म प्राप्ति को इंद्रियों पर नियंत्रण आवश्यक है, गायत्री साधना से इंद्रियों को नियंत्रित किया जा सकता है। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि जिस तरह कछुआ प्रतिकुल अवसर आने पर हाथ-पैर व सिर को सिकोड़कर अंदर समेट लेता है और बाहरी आडंबरों से अपने अंगों को बचाए रखता है। उसी तरह साधक साधना से अपने इंद्रियों को संयमित कर मनोवांछित फल प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि नवरात्र के दिनों में मनोयोगपूर्वक गायत्री साधना करने से अपने इंद्रियों को संयमित किया जा सकता है। डॉ. प्रणव पंड्या ने शुक्रवार को नवरात्र साधना में अपने-अपने घरों में जुटे देश-विदेश के गायत्री साधकों को दिए अपने वर्चुअल संदेश देकर मार्गदर्शन किया हैं। उन्होंने कहा कि गायत्री के सिद्ध युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने गायत्री की प्रचंड साधना की और वे अपनी जिह्वा से लेकर समस्त इंद्रियों को अपनी इच्छानुसार चलाते थे। डॉ. पंड्या ने कहा कि गायत्री साधना साधक में सतोगुण का विकास करती है और उन्हें रजोगुण से मुक्ति दिलाती है।
हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा ...
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