हरिद्वार। खड़खड़ी में सूखी नदी पर बनाए गए पुल निर्माण की सुस्त गति पर मेला अधिकारी दीपक रावत ने मौके पर अधिकारियों को फटकार लगाई। साथ ही दो टूक शब्दों में कहा कि अगर काम उनके बस का नहीं है तो वे यहां से तबादला करा लें। अधिकारियों को 20 दिसंबर तक पुल का काम समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अधिकारियों को मौके पर कैमरे लगाने के आदेश दिए हैं ताकि वे कार्यालय से कार्य की प्रगति पर नजर रख सकें । शुक्रवार को खड़खड़ी स्थित सूखी नदी पर बन रहे अति महत्वपूर्ण पुल के निर्माण की सुस्त रफ्तार को देख मेलाधिकारी ने मौके पर मौजूद लोक निर्माण विभाग के एई और जेई को जमकर फटकार लगाई। मेले और स्नान पर्वों के सूखी नदी खड़खड़ी पर बना पुल काफी परेशानी खड़ी करता था। जिसे देखते हुए मेला प्रशासन ने कुंभ निधि से नए पुल का निर्माण 40 दिन पहले शुरू कराया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने दिनों में बामुश्किल 20 फीसदी ही काम हो पाया। पुल के एक हिस्से पर काम शुरू किया गया है जबकि बाकी हिस्से में एक ईंट भी नहीं लगी है। निरीक्षण के दौरान यह देख मेला अधिकारी दीपक रावत भड़क गए। मौके पर मौजूद एई और जेई को जमकर फटकार लगाने के साथ मौके पर रहकर काम मे तेजी लाने के निर्देश दिए। मेलाधिकारी ने निर्माणाधीन कार्य पर नजर रखने के लिए मौके पर इंटरनेट प्रोटोकॉल कैमरे लगाने के निर्देश दिए, ताकि वे कार्य की प्रगति पर अपने कार्यालय से नजर रख सकें। इन कैमरों को लगाने के लिए 48 घंटे का समय दिया गया है। करीब 2 करोड़ 35 लाख की लागत से बनने वाले 44 मीटर लंबे और 12 मीटर चैड़े इस पुल का लाभ मेले में तभी उठाया जा सकता है जब इसका निर्माण समय से पूरा होगा। मेलाधिकारी दीपक रावत के अनुसार पुल पर काम की काफी सुस्त रफ्तार देखने को मिली। यदि अब भी काम में तेजी नहीं आई तो एई और जेई का तबादला कराकर दूसरे अधिकारी लाए जाएंगे। यह मेले के लिए एक महत्व प्रोजेक्ट है यदि यह समय से पूरा नहीं होता तो मेले में भारी दिक्कत आएगी। इस दौरान अपर मेलाधिकारी ड़ाॅ0 ललित नारायण मिश्रा , उप मेलाधिकारी दयानंद, अधीक्षण अभियंता तकनीकी सेल, हरीश पांगती, ओ एस डी मेला, महेश शर्मा तथा सिचाई विभाग के अभियंता इत्यादि थे।
हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा ...
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