हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के मुखिया महंत व कुंभ मेला प्रभारी श्रीमहंत दुर्गादास महाराज ने प्रैस को जारी बयान में कहा है कि मेला प्रशासन कनखल क्षेत्र से अतिक्रमण हटाकर सड़कों का चैड़ीकरण करे। कनखल में चार अखाड़ों श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन, श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन, श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल व श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी मौजूद हैं। चारों अखाड़ों की छावनियां भी कनखल में ही स्थित हैं। कुंभ मेला शुरू होने का समय लगातार नजदीक आ रहा है। अखाड़ों के रमता पंच हरिद्वार पहुंचना शुरू हो जाएंगे। इसके बाद देश भर से संतों का आगमन शुरू हो जाएगा। कनखल के चैक बाजार में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण है। जिससे कुंभ मेले के दौरान आने वाले संतों व श्रद्धालुओं को भारी समस्या का सामना करना पड़ेगा। इसलिए मेला प्रशासन को जल्द से जल्द अतिक्रमण हटवाकर सड़कों का चैड़ीकरण करना चाहिए। जिससे कुंभ के दौरान निकलने वाली अखाड़ों की पेशवाई में किसी प्रकार का कोई व्यवधान उत्पन्न ना हो। महंत निर्मलदास महाराज ने कहा कि सन्यास मार्ग पर चल रहे निर्माण कार्य में अनियमितताए नहीं बरती जानी चाहिए। कुंभ मेला निर्माण कार्य पारदर्शिता से किए जाने चाहिए। उन्होंने कनखल के समस्त गंगा घाटों व मठ मंदिरों के सौन्दर्यकरण कार्यो में तेजी लाने की मांग करते हुए कहा कि कुंभ मेला प्रशासन को निर्माण कार्य के लिए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती करनी चाहिए। कोठारी महंत दामोदरदास महाराज ने कहा कि कुंभ मेला सनातन परंपरांओं का केंद्र बिन्दु है। कोविड संक्रमण को देखते हुए राज्य सरकार को कुंभ मेले को संपन्न कराने के लिए नीतिगत व्यवस्था को लागू कराना चाहिए। सतीघाट मार्ग की हालत बेहद खराब है। प्रशासन को जल्द से जल्द सतीघाट मार्ग का पुर्ननिर्माण कराना चाहिए।
हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा ...
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