हरिद्वार। रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम हरिद्वार के कनखल में 210 बिस्तरों वाला मल्टी स्पेशलिटी चैरिटेबल अस्पताल है। यह रामकृष्ण मिशन की यह शाखा स्वामी विवेकानंद के दो शिष्यों स्वामी कल्याणानंद महाराज और स्वामी निश्चलानंद महाराज द्वारा 1901 में स्थापित किया गया था । अस्पताल उत्तराखंड में और उसके आसपास गरीब रोगियों की उपचार आवश्यकता पूरी करता है। अपनी स्थापना के बाद से इस अस्पताल ने 10 मिलियन से अधिक रोगियों का इलाज किया है। इस अस्पताल में उच्च कोटि के चिकित्सक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम साधु-संतों और जरूरतमंद लोगों के निरूशुल्क इलाज के लिए एक बहु-विशेषता अस्पताल बन गया है । यह अस्पताल 18 एकड़ के परिसर में स्थित है, और इसमें डेयरी और कृषि भूमि के अलावा स्त्री रोग और प्रसूति, बाल रोग, गहन चिकित्सा इकाइयां, पैथोलॉजिकल प्रयोगशाला, ब्लड बैंक, ऑपरेशन थिएटर और डायलिसिस, मेडिकल स्टोर आदि की सुविधा है। रामकृष्ण मिशन आश्रम कनखल के सचिव स्वामी नित्य शुद्धानंद महाराज के नेतृत्व और स्वामी दयाधिपानंद महाराज के संयोजन में श्यामपुर कांगड़ी में 200 से ज्यादा जरूरतमंद ग्रामीणों को सर्दियों की जरूरत को देखते हुए गर्म कपड़े, दवाइयां, खाद्य सामग्री और मास्क वितरित किए। इस अवसर पर स्वामी नित्यशुद्धानंद महाराज ने कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि नर सेवा नारायण सेवा है और हर साल रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम कनखल उनकी जयंती के अवसर पर रोगी नारायण सेवा का आयोजन करता है। कार्यक्रम के संयोजक स्वामी दयाधिपानंद महाराज ने कहा कि कोरोना काल के समय लॉकडाउन के वक्त रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम कनखल ने 6 हजार से ज्यादा जरूरतमंद लोगों को खाद्यान्न सामग्री निरूशुल्क वितरित की। इस अवसर पर मिशन के स्वामी उमेश्वरानंद मंजू महाराज, स्वामी जगदीश महाराज, समाजसेवी शिखर पालीवाल समेत कई संत और मिशन के कई कर्मचारी मौजूद थे।
हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा ...
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