हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने हिंदी पत्रकारिता दिवस पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं प्रदान करते हुए कहा कि हिंदी भाषा के उत्थान के लिए युगल किशोर शुक्ल द्वारा उदंत मार्तंड समाचार पत्र का प्रकाशन किया जाना एक साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय था। हिंदुस्तानियों के हित के लिए आवाज उठाने हेतु उदंत मार्तंड का प्रारंभ किया गया। जिस कारण हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। पत्रकार समाज का आईना है जो समाज में घटित घटनाओं को हर परिस्थिति और काल में समाज के समक्ष रखता है और पत्रकारिता का मुख्य कार्य सूचना प्रदान करना जनमत को आकार देना और लोकतंत्र की रक्षा करना है। प्रैस को जारी बयान में श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि मनुष्य जिज्ञासु है। उसका नई नई चीजों के बारे में घटनाओं के बारे में ताजा जानकारी रखना सहज स्वभाव है। पत्रकारिता इसी जिज्ञासा को शांत करने का काम करती है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अविभाज्य अंग है। प्रतिपल परिवर्तित होने वाले जीवन और जगत का दर्शन मात्र पत्रकारिता द्वारा ही संभव है और परिस्थिति के अध्ययन चिंतन मनन और आत्माभिव्यक्ति की प्रवृत्ति और दूसरों का कल्याण अर्थात लोकमंगल की भावना ने ही पत्रकारिता को जन्म दिया है। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर सभी पत्रकारों को अनेक शुभकामनाएं प्रदान करते हुए उन्होंने सभी के उज्जवल भविष्य की कामना की और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आवाहन किया। श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि पत्रकारिता वह विद्या है। जिसमें सभी प्रकार के पत्रकारों के कार्य कर्तव्य और लक्ष्य का विवेचन होता है। वास्तव में पत्रकारिता समय के साथ समाज की दिग्दर्शिका और नियामिका है। जो विशिष्ट काल और परिस्थिति के आधार पर तथ्यों का परोक्ष मूल्य का संदर्भ प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता वह धर्म है। जिसका संबंध पत्रकार के उस धर्म से है जिसमें वह तत्कालिक घटना और समस्याओं का अधिक सही और निष्पक्ष विवरण पाठक के समक्ष प्रस्तुत करता है।
हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा ...
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