हरिद्वार। तीर्थ नगरी हरिद्वार में न्यूरोथेरेपिस्ट चिकित्सकों का राष्ट्रीय अधिवेशन होने जा रहा है। जिसमें देशभर के करीब 200 से ज्यादा न्यूरोथैरेपिस्ट भाग लेंगे। उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलपति सुनील जोशी न्यूरोथैरेपिस्ट का मार्गदर्शन करेंगे। लाजपतराय मेहरा न्यूरोथेरेपी ’रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की बैठक जम्मूयात्री भवन,भूपतवाला में आयोजित की गई। बैठक को संबोधित करते हुए कोषाध्यक्ष सुमित महाजन एवं राष्ट्रीय महामंत्री राम गोपाल परिहार ने बताया कि हर साल की तरह इस साल 21 से 23 अगस्त तक लाजपतराय मेहरा नेचरोथेरेपी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट का राष्ट्रीय अधिवेशन हरिद्वार में होगा। देशभर से 200 से अधिक न्यूरोथेरेपीस्ट अधिवेशन भाग लेंगे। सभी न्यूरोथेरेपी स्टाफ को डॉक्टर सुनील जोशी कुलपति आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी देहरादून और डॉक्टर अवधेश पांडे रिसर्चर कंप्लीमेंट्री साइंसेज डॉक्टर के.बाबू चाइल्ड स्पेशलिस्ट चंडीगढ़ के द्वारा आए हुए डेलिगेट्स का मार्गदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यूथैरेपी भारतीय प्राचीन वैदिक पद्धति है। जिसमें बिना दवा के हर एक बीमारी का सफल इलाज किया जाता है। जिसके जन्मदाता डॉक्टर लाजपतराय मेहरा थे। जिन्होंने न्यूरोथेरेपी का आविष्कार किया। न्यूरोथेरेपी के पूरे देश भर में 15 सौ से अधिक उपचार के केंद्र चल रहे हैं। 12वीं पास बेरोजगार बच्चों को प्रैक्टिकल न्यूरोथेरेपी की ट्रेनिंग देकर अपने पांव पर खड़ा किया जाता है। रविवार को मीटिंग में उत्तराखंड प्रदेश के न्यूरोथेरेपीस्ट ने भाग लिया। देव आहूजा, इशांत, बलराम शाह,नौशीन, मोहिनी मदान, आरती, संगीता विशेष रुप से कार्यक्रम की तैयारी के लिए उपस्थित रहे
हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा ...
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