हरिद्वार। सेक्टर-2 बैरियर के समीप स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में 10 दिनों तक चलने वाले दशलक्षण महापर्व का शुभारंभ किया गया। जिसमें जैन समाज के लोगों ने विशेष पूजा अर्चना कर विश्व कल्याण की कामना की। इस अवसर पर श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए ब्रह्मचारिणी आभा दीदी ने कहा कि दशलक्षण महापर्व जीवन में नई चेतना और उत्साह का संचार करता है। अपनी आत्मा को पवित्र बनाने का यह मूल समय है। हम सभी को अपनी आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार करवाते हुए अपने जीवन के मूल तत्वों का ज्ञान होना आवश्यक है। जीवन ईश्वर का वरदान है और हमें इसे ईश्वर के लिए ही समर्पित करना चाहिए। पर्वाधीराज पर्यूषण पर्व के दौरान सभी को विशेष नियमों का पालन करना चाहिए और अपने अंतर करण को शुद्ध करते हुए परमात्मा की प्राप्ति के साधनों को प्राप्त करना चाहिए। ईश्वर इस प्रकृति के कण-कण में विराजमान है और भक्तों की सूक्ष्म प्रार्थना से ही प्रसन्न होकर उन्हें मनवांछित फल प्रदान करते हैं। भारतीय जनता पार्टी के जिला सचिव ओमकार जैन ने कहा कि आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के पावन वर्षा योग दशलक्षण महापर्व के दौरान हमें अपने भीतर एक नई ऊर्जा का संचार करते हुए अहम का परित्याग करना चाहिए। जैन समाज देश को उन्नति की ओर अग्रसर करने में अपनी अहम भूमिका निभाता चला आ रहा है। शांति और सद्भावना हमारे जीवन का मूल उद्देश्य है। धर्म के मार्ग पर चलकर ही ईश्वर की प्राप्ति की जा सकती है। बालेश चंद्र जैन ने कहा कि यदि व्यक्ति को परमात्मा की शरण में पहुंचना है तो उसे त्याग और तपस्या को अपनाना होगा। ईश्वर अति सूक्ष्म और निराकार है। जिनकी पहचान करना ही मानव जीवन का उद्देश्य है। हम सभी को दशलक्षण महापर्व के दौरान अपने जीवन को पवित्र बनाना चाहिए और सभी को मानवता का संदेश देते हुए समाज में एकता और भाईचारे को संतुलित बनाना चाहिए। इस दौरान सतीश चंद्र जैन, विजय कुमार जैन,संदीप कुमार जैन,रजनीश जैन,अमित जैन,राकेश कुमार जैन,सुरेश चंद जैन, जेसी जैन,यूसी जैन,इंदु जैन,सुशीला जैन,मीनाक्षी जैन,प्रतीक्षा जैन,रजनी जैन सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा ...
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