देहरादून। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ.जगमोहन राणा ने कहा कि आज हम अमृतकाल के दौर से गुजर रहे हैं और यह समय देश को पुनःविश्वगुरु बनाने का है। संगोष्ठी कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए उन्होंने कहा कि जब तक समाज शिक्षा के महत्व को नहीं समझेगा,तब तक प्रगति संभव नहीं है।डॉ.राणा ने कहा,“शांति तभी स्थापित होगी,जब भारत महान बनेगा और यह महानता शिक्षा के माध्यम से ही आएगी। शिक्षा ही समाज में परिवर्तन का पहिया है।”उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी,तभी भारत विश्वगुरु बन सकेगा।उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भी भारत ज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी रहा है।यहां ज्ञान को संस्कारों से जोड़ा गया था,लेकिन दुर्भाग्यवश उसका संरक्षण नहीं हो पाया। डॉ.राणा ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में चरित्र निर्माण और मूल्यों की आवश्यकता पर भी बल दिया।उन्होंने कहा,“हमें ऐसी शिक्षा व्यवस्था बनानी होगी,जिसमें चरित्र और मूल्य दोनों का समावेश हो। तभी भारत पुनःवंदनीय और महान राष्ट्र बन सकेगा।”भारतीय वन अनुसंधान संस्थान के पूर्व महानिदेशक डॉ एसएस नेगी ने सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत को 2047 में विश्व गुरु बनाने का हमने संकल्प लिया है, लेकिन एक बड़ी चुनौती हमारे सामने है। उन्होंने कहा कि भारत की 65 फीसदी आबादी गांवों में रहती है।इसके बावजूद गांव और शहरों के बीच आर्थिक असमानता बहुत ज्यादा हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पिछड़ती जा रही हैं। इसलिए ग्रामीण विकास पर फोकस करना जरूरी है,विकास में समानता आवश्यक है। सत्र में शांतिकुंज के व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरी ने भी विचार रखे।
हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है। महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा ...
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