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आर्थिक विषमता एवं आसुरी शक्तियां बढ़ने से होती है दैवीय सत्ता की आवृति
April 25, 2020 • Sharwan kumar jha • religious

हरिद्वार। गीता ज्ञान के प्रणेता महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने कहा है कि कलयुग के बाद सतयुग का आगाज होता है और आर्थिक विषमता एवं आसुरी शक्तियां जब बढ़ती हैं,तब दैवीय सत्ता की आवृत्ति होती है। जिसके लक्षण दिखाई देने लगे हैं। यह उद्गार उन्होंने श्रीगीता विज्ञान आश्रम के तत्वावधान में संचालित भोजन प्रसाद सेवा में पधारे साधनहीन एवं असहाय व्यक्तियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। धर्म और सत्य की उपेक्षा से उपजने वाली सामाजिक विसंगतियों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति का विरोध करना मानव का स्वरूप बनता जा रहा है। यही कारण है कि मानवता अब दानवता में बदल रही हैं। परिवार एवं समाज के रिश्ते समाप्त हो रहे हैं। अधर्म एवं अनीति का वर्चस्व बढ़ रहा है। जब ऐसा वातावरण बनता है तो प्रकृति अपने विरोध का बदला लेती है। परमात्मा ने प्रत्येक जीवधारी को स्वस्थ रहकर अपनी आयु पूर्ण करने के लिए धराधाम पर भेजा और मानव योनि को सभी में श्रेष्ठ माना। लेकिन मनुष्य ने मानवता को त्याग कर दानवता का जो तांडव प्रारंभ किया तो प्रकृति ने उसके प्रतिकार स्वरूप बीमारियों का समावेश कर दिया। यही कारण है कि सभी जीवधारियों में केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो नाना प्रकार के जो प्रकार के रोगों से ग्रसित हो रहा है। दान ज्ञान और तप को धराधाम पर अमर बताते हुए उन्होंने कहा कि जब दैवीय आपदा का प्रकोप होता है। तब दानवीर ज्ञानी एवं तपस्वी पुरुष ही बचते हैं जो कलयुग को पार कर सत्य युग का दर्शन करते हैं। भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्व में सर्वोपरि है और सभी का कल्याण चाहता है। इसीलिए प्राकृतिक प्रकोप का प्रभाव भारत भूमि मे दुनिया के अन्य देशों की तुलना में कम होता है। युग परिवर्तनशील होते हैं तथा समय चक्र बदलता रहता है और प्रभु सभी का कल्याण करते हैं।