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बेरोजगारो को स्वंय का रोजगार उपलब्ध कराते हुए आत्मनिर्भर बनाना होगा-जिलाधिकारी
June 11, 2020 • Sharwan kumar jha • administrative

हरिद्वार। जिलाधिकारी सी.रविशंकर ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत जिले के अधिकांश युवाओं को योजना में आच्छाादित करने के सम्बन्ध में अधिकारियों की बैठक ली। डीएम ने कहा कि कोरोना संक्रमण अवधि में अपनी आजीविका को छोड़ हरिद्वार लौटे प्रवासियों को फिर से आर्थिक रूप से सबल बनाने उद्यमशील युवाओं एवं स्थानीय नागरिकों की आर्थिक स्थिति को पुनः सशक्त बनाने के लिए जरूरी है कि योजना का लाभ प्रत्येक जरूरतमंद तक पहुंचे। कुशल एवं अकुशल दस्तकारों एवं हस्तशिल्पियों तथा शिक्षित शहरी व ग्रामीण बेरोजगारी को स्वंय का रोजगार उपलब्ध कराते हुए आत्मनिर्भर बनाना होगा। बैठक में महाप्रबंधक उद्योग, सेवा योजन, कृषि, उद्यान, डेयरी विकास, मत्स्य, पयर्टन से सम्बंधित विभागों को ग्राम प्रधानों के माध्यम से ग्राम स्तर पर भी ऐसे प्रवासियों को चिन्हित करना होगा। आवेदक व्यक्ति को स्वयं के उद्यम/व्यवसाय की स्थापना करने के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक/अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों/क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जायेगा। योजना के सम्बंध में कोई भी जानकारी तथा मार्गदर्शन जिला उद्योग केन्द्रों के माध्यम से लगातार कराया जाता रहे। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’’ के अन्तर्गत स्वरोजगार हेतु किसी सेवा, व्यवसाय तथा सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना कर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का सृजन, युवा उद्यमियों, उत्तराखण्ड के ऐसे प्रवासी जो कोविड-19 के कारण राज्य में वापस आये हैं को यथासम्भव उनके आवासीय स्थल के पास रोजगार के अवसर सुलभ कराना है तथा पर्वतीय व ग्रामीण क्षेत्रों से नौकरी की खोज में होने वाले पलायन को रोकना है। योजना के अंतर्गत राष्ट्रीयकृत बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों व अन्य बैंकों के माध्यम से पात्र विनिर्माणक, सेवा व व्यावसायिक गतिविधियों की स्थापना के लिए वित्त पोषण किया जाएगा जिसके सापेक्ष सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा योजनान्तर्गत मार्जिन मनी की धनराशि अनुदान के रूप में उपलब्ध करायी जाएगी। विनिर्माण क्षेत्र के उद्यम के लिए परियोजना की अधिकतम लागत रूपये 25 लाख तथा सेवा व व्यवसाय क्षेत्र के लिए अधिकतम लागत रूपये 10 लाख होगी। योजना के अंतर्गत एमएसएमई नीति-2015 में वर्गीकृत श्रेणी ए में मार्जिन मनी की अधिकतम सीमा व मात्रा कुल परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तथा श्रेणी बी में कुल परियोजना लागत का 20 प्रतिशत तथा श्रेणी सी व डी में कुल परियोजना लागत का 15 प्रतिशत मार्जिन मनी के रूप में देय होगी। उद्यम के 2 वर्ष तक सफल संचालन के उपरान्त मार्जिन मनी अनुदान के रूप में समायोजित की जाएगी। अधिक आवेदन प्राप्त होने पर प्रोजेक्ट विजीबिलटी देखते हुए फस्र्ट कम फस्र्ट सर्व के आधार पर चयन किया जाएगा। आवेदक द्वारा अपना आवेदन जनपद के महाप्रबन्धक जिला उद्योग केन्द्र को प्रस्तुत करना होगा। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी विनीत तोमर, मुख्य कृषि अधिकारी श्री वीके यादव, महाप्रबंधक जिला उद्योग श्रीमती अंजनी रावत, मुख्य उद्यान अधिकारी नरेन्द्र यादव, कृषि अधिकारी विकेश कुमार यादव, सहायक निदेशक मत्स्य अनिल कुमार, सहायक निदेशक डेयरी पीयूष आर्य आदि उपस्थित थे।