ALL political social sports other crime current
चुनौतियों को जीतने वाला ही शूरमा कहलाता है
March 7, 2020 • Sharwan kumar jha

हरिद्वार। जीवन चुनौतियों एवं संघर्ष से जुडी एक यात्रा है। जिसमे लक्ष्य प्राप्ति को उददेश्य मानकर चुनौतियों को जीतने वाला ही शूरमा कहलाता है। आज आम आदमी शारीरिक असफलता होने पर हताशा और निराशा की गिरफ्त में आ जाता है जिससे बचा शेष जीवन उसे बोझ दिखने लगता है। ऐेसे प्रेरणादायक घटनाक्रम को यदि किसी फिल्म के द्वारा छात्रों के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा तो यह अधिक प्रभावकारी होता है। इसी उददेश्य से गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग ने सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से फिल्म शूरमा का फिल्मांकन प्रोजेक्टर के माध्यम से विभागीय सम्मेलन कक्ष मे किया गया। फिल्म की कहानी वर्ष 2016 मे अर्जुन अवार्ड प्राप्त हॉकी खिलाडी संदीप कुमार पर आधारित है। जिन्होने कमर में गोली लगने के कारण हुये असहाय शरीर को अपनी दृढ इच्छा शक्ति के बल पर फिर से कामयाबी पर पहुंचाया तथा भारतीय हॉकी खिलाडी के सफल खिलाडी के रूप में अपने आप को सिद्ध किया। इससे पूर्व डीन, छात्र कल्याण प्रो0 आर0के0एस0 डागर ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुये कहा कि फिल्म एक सशक्त माध्यम है जो जीवन पर गहरी छाप छोडती है। तीन घंटे के समय में जीवन के सभी पहलुओं को दर्शाते हुये चुनौतियो का सामना करने का तरीका समझ में आता है। मनोवैज्ञानिक एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ० शिवकुमार चैहान ने कहा कि फिल्म के माध्यम से जीवन मे मूलभूत परिवर्तन होते है। ये परिवर्तन कभी-कभी आश्चर्यजनक परिणाम पैदा करते है। कार्यक्रम का संचालन कनिक द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ० अजय मलिक, डॉ० कपिल मिश्रा, डॉ० अनुज कुमार, सुनील कुमार, प्रणवीर सिंह, दुष्यंत सिंह राणा, संतोष रॉय, अश्वनी कुमार, धर्मेन्द्र बिष्ट आदि उपस्थित रहे।