दिवंगत हथिनी पवनकली को साध्वी का दर्जा,स्मृति में समाधि स्थापित करने की घोषणा
March 18, 2020 • Sharwan kumar jha

हरिद्वार। श्री निर्मल पंचायती अखाड़े में संत महापुरूषों ने अखाड़े की हथिनी पवनकली की स्मृति में शांतिपाठ का आयोजन कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इस दौरान बड़ी संख्या में संत समाज ने हथिनी पवनकली को मानव हितेषी व संतों की प्रिय बताया। अखाड़े की ओर से दिवंगत हथिनी पवनकली को साध्वी का दर्जा प्रदान करते हुए उनकी स्मृति में समाधि स्थापित करने की घोषणा भी की। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव ंिसंह महाराज ने कहा कि सद्गुरूओं के आशीर्वाद से भगवान श्री गणेश के स्वरूप में हथिनी पवनकली निर्मल अखाड़े को प्राप्त हुई थी। लंबे समय तक शहर में होने वाले विभिन्न धार्मिक आयोजनों की शान रही पवनकली जीवात्मा के रूप में सदैव विद्यमान रहेगी। उन्होंने कहा कि संतों के सानिध्य में जो भी जीव जंतु आ जाता है वह भी मानवीय गुणों से युक्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि 1974 में बाल अवस्था में अखाड़े में आयी पवनकली कई महाकुंभ मेले और अर्द्धकुंभ मेले के दौरान निकलने वाली अखाड़ों की पेशवाई में आकर्षण का मुख्य केंद्र रहती थी। अखाड़े के संतों की अतिप्रिय रही पवनकली के निधन से संत समाज गमगीन है। क्षेत्र के लोग भी पवनकली से बेहद स्नेह करते थे। कोठारी महंत जसविन्दर सिंह महाराज ने कहा कि हथिनी पवनकली हमेशा ही अखाड़े की शान रही है। वर्षो से पवनकली शोभायात्राओं व अन्य धार्मिक आयोजनों में मुख्य भूमिका निभाती रही है। कुंभ को देखते हुए जल्द ही पवनकली की बहन के रूप में एक अन्य हथिनी को अखाड़े में लाया जाएगा। पवनकली हमेशा ही सभी स्मृतियों में जीवंत रहेगी। महंत प्यारा सिंह व महंत अमनदीप सिंह महाराज ने कहा कि पवनकली की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए निर्मला छावनी में उसकी समाधि स्थापित की जाएगी। महंत सतनाम सिंह ने बताया कि एक बार वन विभाग के अधिकारी पवनकली को जंगल में छोड़ आए थे। लेकिन जंगल में पवनकली ने खाना पीना त्याग दिया। इस पर वन विभाग के अधिकारी पुनः उसे निर्मला छावनी में छोड़ कर गए। इस अवसर पर महंत गुरमीत सिंह, महंत प्रेमदास, महंत सतनाम सिंह, महंत श्यामप्रकाश, स्वामी ज्ञानानंद, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी दिनेशदास, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, महंत सूरज दास, स्वामी अरूण दास, महंत जमनादास, महंत खेमसिंह, महंत सुखमन सिंह, महंत दलजीत सिंह, संत रोहित सिंह, संत विष्णु सिंह, संत तलविन्दर सिंह, संत जसकरण सिंह, ज्ञानी जैल सिंह आदि सहित बड़ी संख्या में संत महापुरूष मौजूद रहे।