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एक-एक श्वास व कर्म में यज्ञ का भाव हो समाहित, यही होली पर्व की सार्थकता-आचार्य बालकृष्ण
March 6, 2020 • Sharwan kumar jha

हरिद्वार,। पतंजलि योगपीठ स्थित आयुर्वेद भवन में फाल्गुनी नवसस्येष्टि यज्ञ का आयोजन कर आचार्य बालकृष्ण ने समस्त देशवासियों को परम्परागत होली पर्व के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस ऋतु में चारों ओर विविध प्रकार के पुष्प व फसलें तैयार हो जाती हैं। फसलों का यज्ञ में आधन करके फाल्गुनी नवसस्येष्टि का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि होलक का अभिप्राय अर्ध-पक्व अन्न से है। इसे आषाढ़ी नवसस्येष्टि भी कहते हैं। आचार्य जी ने कहा कि हमारे एक-एक श्वास व कर्म में यज्ञ का भाव समाहित हो जाए, यही होली पर्व की सार्थकता है। उन्होंने पतंजलि विश्वविद्यालय के समस्त विद्यार्थियों तथा कार्यक्रम में उपस्थितजनों को होली पर्व पर अपने-अपने घर में परिवारजनों के साथ यज्ञ करने का आह्नान किया। उन्होंने कहा कि हम सात्विक परम्परा का निर्वहन करते हुए उत्सवों को इस रूप में मनाएँ कि हमारे जीवन में उत्साह भर जाए। ऋषि संस्कृति का संवाहक आपको और हमें ही बनना होगा। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि आजकल होली पर्व पर विभि रसायनयुक्त रंगों व नशे का प्रचलन बढ़ रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। होली पर्व पर प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें। कोरोना वायरस सर्दी-जुकाम का ही एक बड़ा रूप है। इसके नाम पर भय का वातावरण बनाया जा रहा है। इस अवसर पर स्वामी परमार्थ देव, पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति महावीर अग्रवाल, मुख्य महाप्रबंधक ललित मोहन , संप्रेषण विभाग प्रमुख बहन अंशुल, सोशल मीडिया प्रमुख बहन पारुल, पतंजलि आयुर्वेद काॅलेज के प्राचार्य डाॅ डी.एन. शर्मा, मुख्य केन्द्रीय प्रभारी राकेश कुमार, पतंजलि विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार श्रीमती प्रवीण पूनिया, बहन साधना, डाॅ अनुराग वाषर्णेय, बहन वेदप्रिया आर्या ने यज्ञ में आहूतियाँ दी। कार्यक्रम में पतंजलि योगपीठ-। व ।।, राजीव दीक्षित भवन, पतंजलि अनुसंधान संस्थान, पतंजलि आयुर्वेद काॅलेज तथा पतंजलि विश्वविद्यालय के समस्त इकाई प्रमुख, विभागाध्यक्ष, प्रभारीगण, निरीक्षकगण, कर्मयोगी भाई-बहन, अध्यापकगण तथा समस्त छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।