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जूना अखाड़े के पूर्व सभापति 125वर्षीय संत के ब्रहमलीन होने पर दी श्रद्वांजलि
May 3, 2020 • Sharwan kumar jha • religious

हरिद्वार। श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के वरिष्ठ सन्त पूर्व सभापति श्रीमहन्त गिरिजादत्त गिरि जी महाराज का रविवार को 125 वर्ष की आयु मे मध्यान्ह 3ः30 बजे ब्रह्मलीन देवलोक गमन हो गया। सायंकाल 5 बजे महाराज जी के आश्रम आशापुरा माता मन्दिर ग्राम नाना रतडिया कच्छ भुज गुजरात में भू-समाधि दी गई। महाराज श्री के सभापति का काल में जूना अखाड़ा में बहुत विकास कार्य हुये। श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के अन्र्तराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहन्त हरि गिरि जी महाराज ने पूर्व सभापित के ब्रहमलीन होने पर ह्रदय से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये कहा कि श्रीमहंतगिरिजादत्त गिरि जी महाराज जूना अखाड़ा के एक बहुत ही अभिन्न अंग थे। वे हम सभी के मार्गदर्शक थे, हमारे पूजनीय गुरू मुर्ति थे, तो निश्चित ही जूना अखाड़ा को बहुत बड़ी आन्तरिक क्षति पहुंची है। कहा कि भगवान दत्तात्रेय से प्रार्थना करते हैं कि ऐसी दिव्य आत्मा को अपने चरणो में स्थान दें ,एवं उनके जितने भक्त हैं उनको इस कष्ट को सहने की शक्ति प्रदान करें। श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के अन्र्तराष्ट्रीय अध्यक्ष सभापति श्रीमहन्त प्रेम गिरि जी महाराज ने भी वायोवृद्ध सभापति श्रीमहन्त गिरिजादत्त गिरि जी महाराज के ब्रह्मलीन होने पर भावांजलि अर्पित करते हुये कहा कि महाराज एक बहुत अच्छे गुरूमुर्ति थे सदैव हम उसने प्रेरणा प्राप्त करते थे वो जूना अखाड़ा के एक बहुत प्राचीन वृक्ष रूप मे थे जो सम्पूर्ण जूना अखाड़ा को अपनी छाया स्वारूप प्रेरणा देते थे वो आज ब्रह्मलीन हो गये है हम सभी को बहुत ही ह्रदयक्षति हुई है हम मां भगवती माया देवी से प्रार्थना करते हैं काशी विश्वनाथ से प्रार्थना करते हैं भैरव बाबा से प्रर्थना करते हैं कि दिव्य आत्मा को अपने चरणो में स्थान दें। वरिष्ठ सभापति श्रीमहन्त सोहन गिरि जी महाराज ने भी शोक प्रकट करते हुते भावांजलि अर्पित की। सैक्रेटरी श्रीमहन्त मोहन भारती जी, सैक्रेटरी श्रीमहन्त महेश पुरी जी,महंत कमल गिरि जी ने दुःख व्यक्त करते हुते भावांजलि अर्पित किया। सम्पूर्ण जूना अखाड़ा की ओर अखाडे के मुख्य संरक्षक श्रीमहन्त हरिगिरि और राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज, श्री दूधेश्वर पीठाधीश्वर ने श्रीमहन्त गिरिजा दत्त गिरि जी महाराज के ब्रह्मलीन होने पर दुःख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि भावांजलि अर्पित किया। कहा कि गिरिजादत्त गिरि जी महाराज सदैव हम सभी का मार्गदर्शन करते रहते थे, वो बहुत अच्छे महापुरुष देवपुरूष के रूप में हम सभी को दर्शन दिया। 125 वर्ष की आयु ब्रह्मलीन हो गये। इससे समस्त जूना अखाड़ा शोककुल होकर भावांजलि श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ब्रहमलीन श्रीमहंत गिरिजादत्त गिरि जो कि पिछले कई वर्षों से अन्न त्याग कर मात्र लौकी का रस फल का जूस ही ग्रहण करके साधाना में रहते थे,वो बहुत सिद्ध गुरु मुर्ति थे। उनके ब्रह्मलीन होने से हम सभी को ना दिखने वाला असहनीय दुःख हुआ है। हम सभी महाराज श्री को भावांजलि श्रद्धांजलि अर्पित करते है।ं भगवान दूधेश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उनकी दिव्य आत्मा को अपने चरणो में स्थान दें।