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किसी भी संगठन की मजबूती उसके कार्यकत्र्ताओं पर होती है निर्भर-उपाध्याय
February 14, 2020 • Sharwan kumar jha

हरिद्वार। शांतिकुंज ने देशभर में संगठन को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से 11 जोन और 125 उपजोन बनाए हैं। विगत वर्षों की कार्य योजनाओं की समीक्षा और भावी योजनाओं के निर्धारण के लिए भारत भर के जोन और उपजोन प्रभारियों की राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। इसका शुभारंभ शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं द्वारा दीप जलाकर किया गया। शिविर के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्ता वीरेश्वर उपाध्याय ने कहा कि किसी भी संगठन का मजबूत होना उनके कार्यकर्ताओं पर निर्भर करता है और गायत्री परिवार इस दिशा में सबसे अलग और मजबूती के साथ दिखाई देता है। आज विश्वभर के लोगों की आशा और अपेक्षाएं गायत्री परिवार से जुड़ी हैं। ऐसे समय में अपनी साधना को पूर्ण करने के साथ निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में लगाने से समाज की आशाएं पूरी कर सकते हैं। साधना की कसौटी से ही मनुष्य निखरता है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर सामूहिक रूप से उसे पूरा करने के लिए मनोयोगपूर्वक जुट जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिद्धांत, नियम, मंत्र को रट लेने मात्र से नहीं, वरन तद्नुसार उसका पालन करने, सतत अभ्यास करने से ही सफलता मिलती है। इससे पूर्व केन्द्रीय जोनल समन्वयक कालीचरण शर्मा ने विगत वर्षों की योजनाओं की समीक्षा एवं भावी योजनाओं पर चर्चा की।संगोष्ठी के समन्वयक ने बताया कि तीन दिन तक चलने वाली इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर के पांच सौ से अधिक चयनित कार्यकर्ता शामिल हैं। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी में कुल बारह सत्र होंगे। जिसमें गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या, शैलदीदी, व्यवस्थापक शिवप्रसाद मिश्र समेत अन्य लोग संबोधित करेंगे। 000धारणा को स्थिर रखना ही है ध्यानः डॉ पण्ड्याहरिद्वार। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में परीक्षा की तैयारी में जुटे विद्यार्थियों को सफलता के विविध सूत्रों की जानकारी के साथ ध्यान की विशेष कक्षा का आयोजन हुआ। डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि धारणा को एक स्थान में स्थिर रखना ध्यान कहलाता है। ध्यान से मन में एकाग्रता बढ़ती है और पढ़े गए विषय भी लंबे समय तक याद रहते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ध्यान से करुणा को जगाकर जगत प्रसिद्ध हुए। बुद्ध ने ध्यान साधना के माध्यम से कई बड़े कार्यों को सहजता के साथ पूरा किया और सभी को ध्यान द्वारा आंतरिक शक्ति के जागरण के लिए प्रेरित भी किया।