राज्य आंदोलनकारियों के अधिकारों के लिए सभी का एकजुट होना जरूरी
March 15, 2020 • Sharwan kumar jha

हरिद्वार। चिह्नित राज्य आंदोलनकारी समिति की बैठक को संबोधित करते हुए हाईकोर्ट के अधिवक्ता रमन शाह ने कहा कि प्रदेश के लिए लड़ाई लड़ने वाले आंदोलनकारियों के अधिकारों को दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी जा रही है। प्रदेश के लिए लड़ने वालों और शहीदों के अधिकार हर सूरत में दिलाए जाएंगे। इसके लिए सबका एकजुट होना सबसे जरूरी है।रमन शाह ने कहा कि आज का उत्तराखंड आंदोलनकारियों के खून और पसीने की देन है। अधिकारों को दिलाने के लिए बीते दो दशकों से यह लड़ाई लड़ी जा रही है। कोर्ट में चल रही यह लड़ाई केवल चिह्नित राज्य आंदोलनकारियों के लिए नहीं है, अपितु उनके लिए भी है जो चिह्निकरण से वंचित हैं। कहा कि आंदोलनकारियों को चिह्नित करने के दौरान काफी अनियमितताएं बरती गईं, जिसके चलते आज तक प्रदेश की लड़ाई लड़ने वाले आंदोलनकारी परेशान हैं। भूपेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के 71 विधायक, 2 राज्यसभा सदस्य और 5 सांसद दिये जाने के बाद भी आजतक आंदोलनकारी स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। चुने गए विधायकों में से 36 विधायक चिह्नित राज्य आंदोलनकारी हैं। बावजूद इसके विधायक बनने के बाद आंदोलनकारियों को सभी ने भुला दिया। आंदोलनकारी अपनी लड़ाई खुद लड़ने को मजबूर हैं। 2 अक्तूबर को शहीद हुए आंदोलनकारियों को आजतक अमर शरीह का प्रमाणपत्र नहीं दिया गया है। सीएम ने राज्य आंदोलनकारियों के संबंध में जितने भी शासनादेश किये, उनमें से आधे से अधिक निरस्त कर दिये गये। महेश गौड ने कहा कि आज जरूरत है कि विभिन्न मंचों में बंटे आंदोलनकारियों को एक मंच पर आकर लड़ाई लड़नी चाहिये। यदि अब भी आंदोलनकारी एक नहीं होते तो वे अपने अधिकारों की लड़ाई नहीं जीत सकते। बैठक में मुख्य रूप से आरएस मनराल, भीमसेन रावत, आनंद सिंह नेगी, राजेंद्र रावत, विजय भंडारी, नरेंद्र सिंह, कृपाल सिंह, सुरेंद्र पंवार, दिनेश सिंह, बलबीर सिंह नेगी, यशोदा भट्ट, राधा नवानी आदि उपस्थित थे।