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रक्षा बंधन पर्व ;श्रावणी उपाकर्म हर्षोल्लास के साथ मनाया गया
August 3, 2020 • Sharwan kumar jha • religious

हरिद्वार। स्वामी रामदेव तथा आचार्य बालकृष्ण के आशीर्वाद से पतंजलि योगपीठ स्थित वैदिक गुरुकुलम् प्रांगण में रक्षा बंधन पर्व ;श्रावणी उपाकर्म हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बहनों ने गुरुसत्ता को रक्षासूत्र बांधकर आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामी रामेदव ने राष्ट्रसेवा में अहर्निश संलग्न सभी माताओं व बहनों को रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने कहा कि रक्षा बंधन मात्र धागों का त्यौहार नहीं है, ये तो प्रतीक हैं कि हम धर्म, मर्यादा, जीवन के श्रेष्ठ आदर्शों व उनके अनुशासन में बंधे हैं। इनका अनुसरण करते हुए हम आगे बढ़ते रहें, यही रक्षा बंधन का संदेश है। जो योग करेंगे व सात्त्विक जीवन के अनुरूप जीवन जीएँगे, वे अपनी रक्षा के साथ-साथ बहन-बेटियों, धर्म व संस्कृति की भी रक्षा कर पाएँगे। उन्होंने कहा कि श्रावणी उपाकर्म युगों-युगों से श्रुति परम्परा का पर्व है। हम अपने पूर्वजों की श्रुति परम्परा का अनुसरण करते हुए ऋषि पथ पर, वेद पथ पर, भगवान् के पथ पर, सत्य के पथ पर, अभ्युदय व निःश्रेयश के पथ पर, प्रवृत्ति व निवृत्ति के पथ पर, त्रिवर्ग व मोक्ष के मार्ग पर, परा-अपरा विद्या के मार्ग पर चलते आए हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व इस बात को मानता है कि योग, आयुर्वेद व अध्यात्म युक्त प्राकृतिक, नैसर्गिक व अहिंसक जीवन पद्वति ही हमारा जीवन कवच है। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि रक्षा बंधन में रक्षासूत्र व यज्ञोपवीत प्रतीकात्मक हैं। हम प्रतिदिन जो यज्ञोपवीत पहनते हैं इसका उद्देश्य भी तो यही है कि हमें स्मरण रहे कि हम ऋणि हैं, उऋण नहीं हैं। भारतवर्ष के कुछ इलाकों तथा नेपाल में इस पर्व को जनेऊ पूर्णिमा कहते हैं। आज मुख्य रूप से यज्ञोपवीत परिवर्तन का दिन है। परम्पराओं के मूल स्वरूप का हमें सतत स्मरण रखना चाहिए। आज भी ऐसी परम्पराएँ हैं कि जिस गुरु ने अपने शिष्य को यज्ञोपवीत धरण कराया, वह गुरु उसकी सदैव रक्षा के लिए संकल्पित रहता है। उन्होंने कहा कि रक्षा सदैव सक्षम व्यक्ति निर्बल की करता है। गुरु को ज्यादा सक्षम माना गया है इसलिए गुरु संकल्प लेता है कि वह अपने शिष्य की रक्षा सदैव करेगा। भाई व बहन में भाइयों को सक्षम माना जाता था किंतु आज हमारी बहनें भाइयों से भी ज्यादा सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि सभी को सबल व सक्षम गुरु मिले तो कोई आत्महत्या नहीं करेगा। कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डाॅ. महावीर ने कहा कि विश्व के कल्याण के लिए कभी महर्षि पतंजलि, गौतम, कणाद के रूप में ऋषि इस धरा पर अविर्भूत हुए, कभी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अवतरित होकर मर्यादा स्थापित की, तो कभी योगेश्वर श्रीकृष्ण के रूप में आकर धर्म की रक्षा का उद्घोष सारे संसार में किया। इस अवसर पर साध्वी आचार्या देवप्रिया, बहन ऋतम्भरा, बहन अंशुल, बहन पारुल, बहन साधना, साध्वी देवमयि, साध्वी देवुश्रुति, साध्वी देवप्रिति, बहन अंजू, बहन नीलम, बहन प्रवीण पूनिया, बहन ज्योति आर्या आदि ने पूज्य गुरुसत्ता को रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद प्राप्त किया।