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सकारात्मक सोच,कार्य कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर सकते है-डा0डोभाल
March 4, 2020 • Sharwan kumar jha

हरिद्वार। जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए हमारी सोच महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करती है। सकारात्मक सोच के माध्यम से हम समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक कार्य कर समाज व राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह कर सकते हैं। यह उद्गार यू कोस्ट के डायरेक्टर जनरल डा0 राजेन्द्र डोभाल ने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में आयोजित विश्वविद्यालय के 119वें स्थापना दिवस के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जिन सिद्धान्तों व विचारों को ध्यान में रखकर विश्वविद्यालय के स्थापना स्वामी श्रद्धानन्द महाराज ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी, उस मसाल को जलाए रख शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर आप निरन्तर आगे अग्रसर होंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महान व्यक्तित्वों का निर्माण होना मानो रूक गया है। आज के दौर में विकास के नाम पर एक दौड़ लग रही है। जो समाज उत्थान के लिए अपने जीवन में काम करते है। यह आपकी सोच पर निर्भर करता है कि आप किस प्रकार के जीवन जीना चाहते हैं।  कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 रूपकिशोर शास्त्री ने कहा कि पर्व हमें जोड़ने का काम करते हैं। आज हम उस महात्मा के प्रति अपनी कृताज्ञता व्यक्त कर रहे है, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण व शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल करते हुए गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना की। स्वामी श्रद्धानन्द महाराज ने अपने जीवन काल में अपने सिद्धान्तों व मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया।            इस अवसर पर हिन्दी के जाने माने मुर्धन्य विद्वान प्रो0 विष्णुदत्त राकेश ने स्वामी श्रद्धानन्द महाराज के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि स्वामी श्रद्धानन्द महाराज के बारे में विस्तार से जानना है तो उनकी पत्रिका कल्याण मार्ग का पथिक का अध्ययन करना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है। इसमें उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से वर्णन किया गया है। उन्होंने कहा कि 1902 से 1915 तक के सदधर्म प्रचारक के विभिन्न अंकों में गुरुकुल के इतिहास को गहराई से जाना जा सकता है।  इस अवसर पर वेद एवं विद्वान विषय पर व्याख्यान माला का आयोजन किया गया, जिसमें देश के जाने-माने वैज्ञानिक प्रो0 बी0डी0 जोशी, पूर्व कुलपति प्रो0 विनोद कुमार, प्रो0 आर0सी0 दुबे ने प्राजेक्टर के माध्यम से वेद व विज्ञान के सामंजस्य पर अपना तथ्योपूर्ण प्रस्तुतिकरण प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को प्रभावित किया। संचालन कार्यक्रम के संयोजक प्रो0 एम0आर0 वर्मा ने किया। कार्यक्रम के अन्त में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो0 दिनेश चन्द्र भट्ट ने सभी आगन्तुकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ यज्ञ के साथ हुआ। इस मौके पर प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के प्रथम तल पर बने नए भवन का लोकार्पण किया गया व युकोस्ट तथा विश्वविद्यालय के बीच अनुबन्ध किया गया। कार्यक्रम में प्रो0 राकेश शर्मा, प्रो0 प्रभात कुमार, प्रो0 श्रवण कुमार शर्मा, प्रो0 देवेन्द्र गुप्ता, प्रो0 सोमदेव शतांशु, प्रो0 ब्रह्मदेव, प्रो0 दिनेश चन्द्र शास्त्री, प्रो0 अम्बुज शर्मा, प्रो0 सोहनपाल सिंह आर्य, प्रो0 वी0के0 सिंह, प्रो0 ईश्वर भारद्वाज, प्रो0 ज्ञानचन्द रावल, प्रो0 एल0पी0 पुरोहित, प्रो0 एस0के0 श्रीवास्तव, प्रो0 डी0एस0 मलिक, प्रो0 आर0के0एस0 डागर, प्रो0 सत्यदेव निगमालंकार, प्रो0 पी0सी0 जोशी,  डा0 श्वेतांक आर्य, प्रो0 नमिता जोशी, डा0 वीना विश्नोई, डा0 अंजली गोयल, डा0 मुदिता अग्निहोत्री, प्रो0 सुचित्रा मलिक, डा0 मृदुला जोशी, डा0 बिन्दु मलिक, डॉ अजय मालिक इत्यादि उपस्थित रहे।