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सुख और दुख प्रत्येक जीवधारी के जीवन के दो मुख्य पहलू होते हैं म0म0विज्ञानानंद
August 11, 2020 • Sharwan kumar jha • religious

हरिद्वार। श्री गीता विज्ञान आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि अयोध्या में बनने वाला श्रीराम मंदिर सनातन धर्म एवं संस्कृति का केंद्र बिन्दु होगा। समाज में बढ़ रहे नैतिक पतन को रोकने में प्रभु श्रीराम के मर्यादित आचरण की प्रेरणा संजीवनी का कार्य करेगी। वे आज विष्णु गार्डन स्थित श्री गीता विज्ञान आश्रम में आयोजित हो रहे श्री कृष्ण जन्माष्टमी कार्यक्रम के अवसर पर आश्रमस्थ संत, विद्यार्थी एवं भक्तों को श्री हरि के अवतारों का महत्व समझा रहे थे। भगवान श्री राम एवं भगवान श्री कृष्ण के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सुख और दुख प्रत्येक जीवधारी के जीवन के दो मुख्य पहलू होते हैं और जो अपने दुख को सहते हुए भी दूसरों के दुख, संकटों का निवारण करता है। वह नर रुप में नारायण बन जाता है। भगवान विष्णु के त्रेता एवं द्वापर दोनों अवतारों के जीवन चरित्र की प्रमुख घटनाओं की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि आज भी सद्चरित्रवान, परोपकारी एवं राष्ट्र भक्तों की प्रतिमाएं लगती हैं तथा अनेक अवसरों पर पुष्प मालाएं अर्पित की जाती हैं। जबकि युग पुरुषों का स्मरण उनके मन्दिरों मे किया  है। प्राचीन काल में राजा महाराजा मंदिरों का निर्माण कराते थे। आज प्रधानमंत्री ने श्रीराम मंदिर का शिलान्यास कर उस सनातन परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। भगवान श्री कृष्ण को प्रेम एवं करुणा के अवतारी बताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान ने स्वयं अपने जीवन में तीन विस्थापन झेले। लेकिन परोपकार के लिए सदैव एक ही पुकार पर सहायता के लिए उपस्थित हो जाते थे। ऐसे युग पुरुष का जन्मोत्सव संपूर्ण समाज के लिए मंगलकारी होता है।