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विश्व गौरेया संरक्षण पर काव्य गोष्ठी का आयोजन
March 20, 2020 • Sharwan kumar jha

हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में गौरेया संरक्षण पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। आयोजन के मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो0 दिनेश भट्ट ने कहा कि 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज शहरी परिवेश में गौरेया प्रजाति में 60 प्रतिशत तक की कमी आई है। यह एक चिन्ता का विषय है। घर के आंगन में चहकने वाली चिडिया हमारे बीच से गायब होती जा रही है। दिल्ली सरकार ने तो 2012 में ही राज्य पक्षी घोषित कर दिया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की रॉयल सोसायटी ऑफ प्रोटैक्शन ऑफ बर्डस ने चुलबुली और चंचल पक्षी को रेड लिस्ट में डाल दिया है। ऐसी स्थिति में गुरुकुल विश्वविद्यालय की पक्षी विविधता प्रयोगशाला द्वारा विकसित लकड़ी के कृत्रिम घौसलें गौरेया को खासे पसन्द आ रहे है और उसकी आबादी में इजाफा हो रहा है। इस अवसर पर अलीगढ़ से आए हास्य कवि देवेन्द्र दीक्षित ‘शूल’ को पक्षी वैज्ञानिक प्रो0 दिनेश भट्ट द्वारा गौरेया संरक्षण के लिए एक नेस्ट बॉक्स देकर सम्मानित किया गया। उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के युवा पक्षी वैज्ञानिक डा0 विनय सेठी ने कहा कि दुनियाभर में ग्रामीण व शहरी इलाकों में गौरेया को लेकर पिछले 2 दशकों से भारी गिरावट देखने को मिल रही है। यूरोप, एशिया के साथ अफ्रीका, न्यूजीलैण्ड, आस्ट्रेलिया और अमेरिका के अधिकतर हिस्सों में हाउस स्पैरो की संख्या में गिरावट देखी जा रही है। प्राकृतिक खुबी है कि यह इंसान की सबसे करीब दोस्त है। इसे बचाने के लिए गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय अथक प्रयास कर रहा है। डा0 सेठी ने गौरेया को लेकर कविता पाठ किया।