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अध्यात्म, भक्ति और आंतरिक चेतना को जागृत करने का पर्व हैं नवरात्र-स्वामी कैलाशानंद गिरी

हरिद्वार।पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि मां दुर्गा को समर्पित नवरात्र अध्यात्म, भक्ति और आंतरिक चेतना को जागृत करने का पर्व है। नवरात्रों के अवसर पर श्री दक्षिण काली मंदिर में दर्शन पूजन के लिए आए भक्तों को नवरात्र उपासना के महत्व से अवगत कराते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि नवरात्र उपासना के दौरान देवी दुर्गा की कृपा से साधक के अंतर्मन में उत्पन्न होने वाली दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा से कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। नवरात्र उपासना से शारीरिक और मानसिक शक्ति का विकास होता है। स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि नवरात्रों में देवी दुर्गा की आराधना करने से अज्ञान रूपी अंधकार नष्ट होता है और ज्ञान की प्रेरणा मिलती है। नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव दूर होता है। उन्होंने कहा कि देवी दुर्गा का प्रत्येक स्वरूप कल्याणकारी है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को नवरात्रों में मां दुर्गा के सभी नौ स्वरूपों की आराधना और पूजा अर्चना अवश्य करनी चाहिए। स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज के शिष्य स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि पूज्य गुरूदेव की नवरात्र साधना ...

सनातन धर्म संस्कृति और सेवा परंपरा को बढ़ावा देगा सेवाश्रय अखाड़ा-स्वामी संतोषानंद

हरिद्वार। महामंडलेश्वर राजगुरू स्वामी संतोषानंद महाराज ने कहा कि सनातन धर्म संस्कृति और समाज में सेवा परंपरा को बढ़ावा देने के लिए सेवाश्रय अखाडे़ का गठन किया गया है।श्रीहनुमान सत्संग सेवाधाम द्वारा गठित सेवाश्रय अखाड़े का उन्हें संरक्षक तथा काशी के अरविन्द त्रिपाठी को अध्यक्ष बनाया गया है। भारतमाता पुरम स्थित एकादश रूद्र पीठ में जानकारी देते हुए स्वामी संतोषानंद महाराज ने बताया कि सेवाश्रय अखाड़े का उद्देश्य सेवा के माध्यम से समाज को सनातन धर्म संस्कृति के प्रति जागरूक करना है। दीन दुखी और जरूरतमंद की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। ऋषि परंपरा के अनुसार सनातन धर्म कां संरक्षण संवर्द्धन करते हुए समाज में सेवा संस्कारों का प्रचार प्रसार किया जाएगा। सेवाश्रय अखाड़े के सेवा साधक समाज के बीच सेवा प्रकल्पों का संचालन करेंगे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म संस्कृति में संत परंपरा सर्वोच्च है।संत परंपरा के माध्यम से ही समाज को ज्ञान की प्रेरणा मिलती है।उन्होंने कहा कि हरिद्वार कुंभ में सेवाश्रय अखाड़ा संतों के साथ ऋषि परंपरांओं को आगे बढ़ाने में योगदान करेगा।महामंडलेश्वर राजगुरू स्वामी संतोषानंद महाराज ने कह...

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने किया प्रो.पीएस चौहान के निधन पर शोक व्यक्त

हरिद्वार। उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने एसएमजेएन कालेज के पूर्व प्राचार्य व हरिद्वार प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार दिवंगत प्रो.पीएस चौहान के आवास पर पहुंचकर उनके परिजनों धर्मपत्नी राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्षा संतोष चौहान, पुत्र डा.मोहित चौहान, पुत्रवधु डा.मनु सिंह से मिलकर प्रो.चौहान के निधन पर शोक व्यक्त किया और सांत्वना देते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए। यशपाल आर्य ने कहा कि स्व.पीएस चौहान वरिष्ठ पत्रकार,विभिन्न विषयों के जानकार,सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने वाले व्यक्तित्व थे और मार्गदर्शक के रूप में उनका हमेशा योगदान रहा है।इतना ही नहीं कांग्रेस को सशक्त करने में भी उनकी अविस्मरणीय भूमिका रही है।यशपाल आर्य ने कहा कि उनकी पत्नी संतोष चौहान के राजनीतिक जीवन में भी उनका बहुत सहयोग रहा है। इस दौरान यशपाल आर्य के साथ ज्वालापुर विधायक रवि बहादुर,मनोज सैनी,तेलूराम ,रकित वालिया,ब्लॉक अध्यक्ष विकास चंद्रा,जतिन हांडा,पार्षद सोहित सेठी,अनिल भास्कर ,हरद्वारी लाल,राजेंद्र श्रीवास्तव, दीपक राज (सोनू लाला) आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

महिषासुर राक्षस का वध करने पर मां दुर्गा महिषासुरमर्दिनी कहलायी-पंडित पवन कृष्ण शास्त्री

हरिद्वार। श्रीअखंड परशुराम अखाड़े द्वारा श्री बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने महिषासुर मर्दिनी का चरित्र श्रवण कराते हुए बताया कि महिषासुर राक्षस का वध करने पर मां दुर्गा महिषासुर मर्दिनी कहलायी। महिषासुर एक बहुत ही मायावी दानव था।वह ब्रह्मऋषि कश्यप और दनु का पोता और रम्भ नामक दैत्य द्वारा महिषी के गर्भ से उत्पन हुआ था। महिषासुर ने ब्रह्मा की कठोर तपस्या करके वरदान प्राप्त किया कि इस ब्रहमांड में और पृथ्वी पर उसे कोई देवता, मनुष्य या दानव मार ना सके।उसकी मृत्यु हो तो किसी स्त्री के हाथों हो। ब्रह्मा से वरदान प्राप्त कर महिषासुर स्वर्ग लोक में देवताओं को परेशान करने लगा और पृथ्वी पर भी उत्पात मचाने लगा।उसने स्वर्ग पर आक्रमण कर और इंद्र को परास्त कर स्वर्ग पर कब्ज़ा कर लिया और सभी देवताओं को वहां से खदेड़ दिया। परेशान होकर देवता ब्रम्हा,विष्णु और महेश के पास सहायता के लिए पहुंचे।सारे देवताओं ने मिलकर उसे फिर से परास्त करने के लिए युद्ध किया लेकिन हार गये।कोई उपाय न मिलने पर देवताओं ने उसके विनाश के ल...

देवशक्तियों की उपस्थिति में गायत्री साधना होती हैं फलवती: डॉ पण्ड्या

हरिद्वार।अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ.प्रणव पण्ड्या ने कहा कि देवशक्तियों की उपस्थिति में गायत्री साधन अधिक फलदायी होती है।पवित्र और दिव्य ऊर्जा के वातावरण में जब हम गायत्री साधना करते हैं,तो हमारे मन और आत्मा पर गहरा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।मानस मर्मज्ञ श्रद्धेय डॉ.पण्ड्या नवरात्र साधना की व्याख्यान माला के अंतर्गत देश-विदेश से आये साधकों को तीर्थ की महिमा विषय पर संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि नैमिषारण्य श्रेष्ठ तीर्थों में से एक हैं,जहाँ अनेक ऋषियों ने साधना की और इच्छित फल प्राप्त किया।इससे पूर्व संगीत के भाइयों ने‘अपनी भक्ति का अमृत पिलो दो प्रभु’ भावगीत प्रस्तुत किया। जिससे साधकों ने मनोयोगपूर्वक साधना करने की ओर प्रेरित हुए।समापन से पूर्व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने महाआरती की। इस अवसर पर देश विदेश से आये गायत्री साधक,देसंविवि-शांतिकुंज परिवार के अनेकानेक लोग उपस्थित रहे।

सौभाग्यशाली लोग ही भगवान की योजना से जुड़ पाते हैं: डॉ.चिन्मय पण्ड्या

हरिद्वार।देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन डॉ.चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि सौभाग्यशाली लोग ही भगवान की योजना से जुड़कर उनके बताये कार्यों में संलग्न हो पाते हैं।जब गिद्ध,गिलहरी से लेकर हनुमान आदि का सौभाग्य जागा,तब वे मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के कार्यों में जुट पाये।मनुष्य का सौभाग्य जब जागृत होता है,तब वह अपने भीतर की पुकार को सुन पाता है। डॉ.चिन्मय पण्ड्या शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित विशेष सभा को संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि यह समय संक्रमण काल से गुजर रहा है।विभिन्न प्रकार की परिस्थितिजन्य स्थिति से लोग जूझ रहे हैं, लेकिन इस परिवर्तनशील दौर में ही हमें अपने सच्चे उद्देश्य और आध्यात्मिक मार्ग को पहचानने की आवश्यकता है।नवरात्रि साधना को डॉ.पंड्या जी ने नवयुग के निर्माण की पहली सीढ़ी बताया और कहा कि भगवान की योजना से जुड़कर ही व्यक्ति अपने जीवन के उद्देश्य को पूरी तरह से समझ पाता है और उससे संबंधित कार्यों में संलग्न हो पाता है।उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार के जनक युगऋषि पूज्य गुरुदेव ने हम सभी को नवयुग के संविधान के रूप में १८आदर्श सूत्र दिये हैं।स्वयं...

पृथ्वी लोक पर सतगुरु का पावन सानिध्य है सतगुरु साक्षात पारब्रह्म है

हरिद्वार। कांगड़ी गाजीवाला स्थित आरती गिरी जी महाराज के आश्रम में पूज्य गुरुदेव श्री बाबा आरती गिरी जी महाराज की चतुर्थ पुण्यतिथि आश्रम में संत महापुरुषों की उपस्थित के बीच बड़े ही धूमधाम के साथ मनायी गयी। इस अवसर पर बोलते हुए किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बुलबुल गिरी महाराज हरियाणा गददीनसीन ने कहा गुरुदेव का पावन सानिध्य इस पृथ्वी लोक पर सूर्य के सामान होता है जो किसी बिना भेदभाव के चाहे छोटा हो चाहे बड़ा हो चाहे गरीब हो या अमीर हो बिना जाति धर्म देखें सभी को एक समान प्रकाशमान ऊर्जा पहुंचते है। इसी प्रकार इस पृथ्वी लोक पर सतगुरु का पावन सानिध्य है सतगुरु साक्षात पारब्रह्म है। इस धरती लोक पर हमारे सतगुरु ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में अवतरित होते हैं जो धर्म-कर्म पूजा पाठ यज्ञ अनुष्ठान तथा तत्व ज्ञान के माध्यम से भक्तों के जीवन का उद्धार करते हैं। सतगुरु के ज्ञान के बिना यह मानव जीवन अधूरा है सतगुरु धर्म कर्म ज्ञान के माध्यम से हमारा मार्गदर्शन करते हुए हमें ईश्वर तक पहुंचाने की युक्ति बताते हैं तथा हमारा मानव जीवन सार्थक करते हैं। महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधान  नंद महाराज ने कहा सतगुरु ...

राष्ट्रभक्ति और मानवता की सेवा ही सच्ची श्रद्धांजलि-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार और धर्म एवं मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले सिखों के नौवें गुरु,श्रीगुरु तेग बहादुर की जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने संदेश में कहा,भारत की सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक विरासत में इन दोनों महापुरुषों का अतुलनीय योगदान है। डॉ.हेडगेवार जी ने राष्ट्रभक्ति और संगठित समाज की भावना को मजबूत किया,गुरु तेग बहादुर ने मानवता की रक्षा के लिए सर्वाेच्च बलिदान दिया। इन महापुरूषोें की जयंती हमें सेवा,त्याग,और निस्वार्थ प्रेम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना करने वाले डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार जी का जीवन देशभक्ति ,अनुशासन और सेवा का प्रतीक है। उनका उद्देश्य था कि भारत को एक संगठित ,आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से सशक्त राष्ट्र बनाया जाए।उनका संपूर्ण जीवन समाज में एकता,समरसता और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने के लिए समर्पित रहा।स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा, डॉ.हेडगेवार जी न...

मां भगवती की आराधना को समर्पित हैं नवरात्र-स्वामी कैलाशानंद गिरी

हरिद्वार। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने नीलधारा तट स्थित श्री दक्षिण काली मंदिर में नवरात्र पूजन कर देवी भगवती से लोक कल्याण की प्रार्थना की। तीसरे नवरात्र पर श्रीदक्षिण काली मंदिर में दर्शन पूजन करने आए श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि नवरात्रि पर्व मां भगवती की आराधना को समर्पित है।इस दौरान साधक पर मां की अपरंपार कृपा बरसती है। नवरात्रों में सच्चे मन से देवी दुर्गा के निमित्त उपवास करने और उनकी आराधना से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।देवी दुर्गा की कृपा से शुभ फल की प्राप्ति होती है।उन्होंने कहा कि समस्त सृष्टि का कल्याण करने वाली मां जगदम्बा शक्ति का अवतार हैं।नवरात्रों में की गयी देवी भगवती की साधना से उनकी अपार कृपा प्राप्त होती है,जिससे जीवन भवसागर पार हो जाता है।उन्होंने कहा कि नवरात्र व्रत का पारायण करते हुए बालिकाओं का पूजन करने से मां भगवती के साथ समस्त देवता भी प्रसन्न होकर साधक को आशीर्वाद प्रदान करते हैं।जिससे व्यक्ति का जीवन सफलता के मार्ग पर अग्रसर होता है।इस अवसर पर स्वामी अवंतिकानंद ...

वैश्य समाज की महिलाओं ने भजन कीर्तन कर किया मां भगवती का गुणमान

हरिद्वार। नवरात्रों के अवसर पर श्रीवैश्य बंधु समाज मध्य क्षेत्र हरिद्वार की महिला विंग की और से प्रदेश व समाज की खुशहाली के लिए अग्रसेन मार्ग स्थित राधा कृष्ण मंदिर में भजन कीर्तन का आयोजन किया गया।कार्यक्रम संयोजक सपना गर्ग के नेतृत्व में महिलाओं ने मां भगवती का गुणगान किया और सभी के लिए मंगल कामना की। मेयर किरण जैसल भी भजन कीर्तन में शामिल हुई।इस दौरान सपना गर्ग ने कहा कि मां भगवती सदैव अपने भक्तों का कल्याण करती है।नवरात्र मां भगवती की कृपा प्राप्त करने का सबसे उपयुक्त अवसर हैं। सभी को नवरात्र साधना अवश्य करनी चाहिए। महिला विंग की संस्थापक शशी अग्रवाल ने कहा कि नवरात्रों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के साथ देवी स्वरूपा कन्याओं के संरक्षण संवर्द्धन का संकल्प भी अवश्य लेना चाहिए। उन्होंने सभी को बेटियों को शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के अवसर देने का संकल्प भी दिलाया। महिला विंग की अध्यक्ष पिंकी अग्रवाल व महामंत्री शालिनी अग्रवाल ने कहा कि नवरात्रों में नौ दिन तक नित्य देवी दुर्गा की पूजा अर्चना और आराधना करने से अंतर्मन के सभी विकार दूर हो जाते हैं। देवी दुर्गा की कृपा से स...

निर्धन और असहाय लोगों को जीवन की नई ऊर्जा प्रदान करेगा सतगुरु कृपा अपना घर-मदन कौशिक

हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार के सप्तसरोवर मार्ग स्थित श्रीकृष्ण प्रणामी निज धाम में ‘सतगुरु कृपा अपना घर’ का उद्घाटन स्वामी सदानंद महाराज,विधायक मदन कौशिक,मेयर किरण जैसल,समाजसेवी डा.विशाल गर्ग,डा.टी.के.गर्ग,मोहन प्रिय आचार्य ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर परमाध्यक्ष स्वामी सदानंद महाराज ने कहा कि यह आश्रय स्थल उन निर्धन,असहाय और तिरस्कृत लोगों काक नया जीवन प्रदान करेगा,जो समाज में उपेक्षित हैं। उन्होंने कहा कि यह आश्रम उन जरूरतमंदों को अपनापन महसूस कराएगा और उनका जीवन उच्च स्तर पर पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं नगर विधायक मदन कौशिक ने कहा कि स्वामी सदानंद महाराज के नेतृत्व में यह आश्रम अशक्त,निर्धन और असहाय लोगों को जीवन जीने की नई ऊर्जा प्रदान करेगा। यह संस्था न केवल आश्रय देगी बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य भी करेगी। विशिष्ट अतिथि नगर निगम मेयर किरण जैसल ने कहा कि यह आश्रम उन बेसहारा और जरूरतमंदों के लिए संजीवनी सिद्ध होगा,जिनका इस संसार में कोई सहारा नहीं है।उन्होंने आशा जताई कि इस पहल से हजारों लोगों का जीवन बदलेगा। समारोह के संयोजक समाजसेव...

कन्या पूजन करने से प्रसन्न होती हैं मां भगवती-पंडित पवन कृष्ण शास्त्री

हरिद्वार। श्री अखंड परशुराम अखाड़े संयोजन में श्री बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के तीसरे दिन की कथा श्रवण कराते हुए कथाव्यास भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने नवरात्रि में नौ दिन तक नित्य मां भगवती का पूजन और अष्टमी व नवमी को हवन पूजन कर कन्या पूजन करने से मां भगवती अत्यन्त प्रसन्न होती है और भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। शास्त्री ने बताया कन्या पूजन में दो वर्ष से दस वर्ष तक की कन्या का पूजन करना चाहिए। दो वर्ष की अवस्था की कन्या को ‘कुमारी कन्या’ कहते हैं। इनका पूजन करने से दुख तथा दरिद्रता दूर होती है। तीन वर्ष की कन्या ‘त्रिमूर्ति’ कहलाती है। इनका पूजन करने से धर्म,अर्थ,काम तीनों पुरुषों की सिद्धि होती है। चार वर्ष से कन्या ‘कल्याणी’ कही जाती है।जो इनका पूजन करता है।उसे सर्वत्र विजय सुख प्राप्त होता है।पांच वर्ष की कन्या‘रोहणी’कहलाती है।शरीर में होने वाले रोगों का नाश इनका पूजन करने से होता है।छःवर्ष की कन्या‘कालिका’कहलाती है।इनका पूजन करने से सभी शत्रु नष्ट हो जाते हैं।सात वर्ष की कन्या ‘चंडिका’कहलाती है। इनका पूजन करने से ऐश्वर्य का...

भूमि को उर्वर व संरक्षित रखना सबसे अहम: डॉ चिन्मय पण्ड्या

देसंविवि में आयोजित भूमि सुपोषण एवं संरक्षण अभियान हरिद्वार।अखिल विश्व गायत्री परिवार सदैव प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध रहा है।इसके अंतर्गत देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में भूमि सुपोषण एवं संरक्षण अभियान कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसके अंतर्गत विशेषज्ञों ने युवा पीढ़ी को भूमि को उर्वर बनाए रखने एवं पर्यावरण को संरक्षित बनाने के विविध उपायों पर जोर दिया।इस अवसर पर अपने संदेश में देसंविवि के प्रतिकुलपति युवा आइकान डॉ.चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारत में लगभग 30प्रतिशत भूमि क्षरण से पीड़ित है,जो हमारी भूमि के प्रति उदासीनता की ओर इंगित करती है। युवा आइकान ने कहा कि विश्व आज अपने पर्यावरण असंतुलन के गंभीरतम दौर से गुजर रहा है।अपने देश में भी तीव्रगति से हो रहे वायु,जल,भूमि प्रदुषण बहुत गंभीर एवं चुनौतीपूर्ण समस्याएँ हैं,जो मानव जीवन के लिए अत्यंत घातक हैं। प्रतिकुलपति ने कहा कि भारतीय दर्शन एकात्म विश्वदृष्टि में विश्वास करता है।संपूर्ण सृष्टि में प्रकृति एवं पर्यावरण के बीच एक अन्योन्याश्रित एवं अविभाज्य संबन्ध है। युवा आइकान डॉ.पण्ड्या ने कहा कि इस अभियान के तहत देश भर में भूम...

तीर्थों में की गई साधना से मिलती है अलौकिक शक्ति: डॉ पण्ड्या

हरिद्वार। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ.प्रणव पण्ड्या ने कहा कि नवरात्र अनुष्ठान  के दौरान प्रयागराज जैसे तीर्थ स्थान में श्रीराम कथा सुनने का अवसर सौभाग्य से मिलता है। पूज्य गुरुदेव शांतिकुंज को गायत्री तीर्थ के रूप में स्थापित किया है। यह एक जाग्रत तीर्थ है।गायत्री साधना के पवित्र और महत्त्वपूर्ण स्थान है।गायत्री साधना के साथ श्रीराम कथा का श्रवण से मन और आत्मा दोनों शुद्ध व निर्मल होता है।गोस्वामी तुलसीदास जी ने प्रयागराज की महिमा को अलौकिक कहते हैं। मानस मर्मज्ञ डॉ.प्रणव पण्ड्या चैत्र नवरात्रि के अवसर पर आयोजित विशेष व्याख्यानमाला में उपस्थित देश विदेश से गायत्री तीर्थ शांतिकुंज आये गायत्री साधकों को संबोधित कर रहे थे। अध्यात्म क्षेत्र के प्रखर विचारक डॉ.पण्ड्या ने कहा कि मनोयोगपूर्वक साधना करने से साधक की दृष्टि निर्मल होती है। साधक का व्यक्तित्व कैलाश शिखर की भांति पवित्र और दिव्य होता है।विश्व गायत्री परिवार प्रमुख ने कहा कि भगवान शिव योगविद्या के स्रोत एवं परम आचार्य हैं।योग साधना की गहनता को सरलता से सिखाने में माहिर हैं।उनकी साधना और ज्ञान की गहराई ही परम आचार्य की ...

श्रद्धा, भक्ति और शक्ति की आराधना का पर्व हैं नवरात्र-स्वामी निर्मलदास

हरिद्वार। गौ गंगा धाम सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी निर्मलदास महाराज ने श्रवणनाथ नगर स्थित तारकेश्वर धाम में नवरात्र साधना के दूसरे दिन श्रद्धालु भक्तों को देवी भगवती की महिमा से अवगत कराते हुए कहा कि यह दिव्य पर्व श्रद्धा, भक्ति और शक्ति की आराधना का प्रतीक है।जो जीवन में नई ऊर्जा,सुख,समृद्धि का संचार करता है।स्वामी निर्मलदास महाराज ने कहा कि नवरात्रों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना करने से जीवन में कभी भी धन संपत्ति और सुख की कमी नहीं रहती है।देवी भगवती की कृपा से साधक को सर्वत्र सिद्धि,विजय और अनंत फल की प्राप्ति होती है।उन्होंने कहा कि कहा कि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना साधक को शक्ति,धैर्य और उत्साह प्रदान करती है। मां भगवती की कृपा से साधक जीवन संघर्ष में अपने कर्तव्य पथ से कभी विचलित नहीं होता और प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त करता है। इस दौरान स्वामी हरिहरानंद,स्वामी रविदेव शास्त्री,स्वामी दिनेश दास,स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि,महंत कपिल मुनि,महंत शिवम महाराज व श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे। 

त्याग, तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति थे ब्रह्मलीन स्वामी प्रकाशानंद महाराज-साध्वी चेतना गिरी

हरिद्वार।ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर पायलट बाबा के शिष्य ब्रह्मलीन स्वामी प्रकाशानंद महाराज की षोड़शी पर संत समाज ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। जगजीतपुर स्थित पायलट बाबा आश्रम में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर साध्वी चेतना गिरी एवं महामंडलेश्वर स्वामी श्रद्धा गिरी ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी प्रकाशानंद महाराज त्याग,तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति थे।ब्रह्मलीन पायलट बाबा द्वारा स्थापित सेवा प्रकल्पों को आगे बढ़ाने में ब्रह्मलीन स्वामी प्रकाशानंद महाराज का अहम योगदान रहा।उनके दिखाए मार्ग चलते हुए मानव कल्याण में योगदान करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।महामंडलेश्वर स्वामी गर्व गिरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी प्रकाशानंद महाराज विद्वान संत थे।जिन्होंने अपने गुरू ब्रह्मलीन पायलट बाबा की शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए आश्रम की सेवा परंपरांओं को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभायी।स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी प्रकाशानंद महाराज की उनके गुरू ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर पायलट बाबा के प्रति अगाध श्रद्धा सभी के लिए प्रेरणादायी है।पायलट बाबा आश्रम...

साक्षात तीर्थ स्वरूप हैं भगवान राम-डा.प्रणव पण्ड्या

हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन देश-विदेश से आए गायत्री साधकों को संबोधित करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डा.प्रणव पंड्या ने रामचरितमानस में तीर्थों के स्वरूप का विस्तार पूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि साधना काल में रामकथा का श्रवण करना पूर्ण तीर्थ समान है। तीर्थ शब्द का अर्थ है-पवित्र करने वाला।तत्काल फल देने वाला पवित्र तीर्थ कहलाता है।उन्होंने कहा कि रामकथा तीर्थों का समूह है इसमें कहीं गंगा,यमुना,सरस्वती,सरयू जैसे पवित्र नदियां तो कहीं प्रयागराज, नैमिषारण्य,अयोध्या,मिथिला,चित्रकूट,पंचवटी,रामेश्वरम जैसे तीर्थ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि राम कथा में राम भक्ति की गंगा प्रवाहित है।भगवान राम स्वयं साक्षात् तीर्थ स्वरूप है, भगवान राम जहां-जहां गए और निवास किया।वे सभी स्थान तीर्थ बन गए। उन्होंने कहा कि युगऋषि पं.श्रीराम शर्मा आचार्य ने युगतीर्थ शांतिकुंज की स्थापना की,जहां सभी धर्म- जाति के लोग तीर्थ सेवन एवं साधना कर सकते हैं। यह सभी के लिए जनसुलभ है। जन सामान्य को तीर्थ का सही स्वरूप समझाने हेतु पं.श्रीराम शर्मा आचार्य ने तीर्थ सेवन से आत्म परिष्क...

हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनायी गयी ईद

नमाज अता कर मांगी मुल्क की खुशहाली और अमन चैन की दुआएं हरिद्वार। ईद-उल-फितर का त्योहार हर्षाेल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। शहर और देहात में ईदगाहों और मस्जिदों में लोगों ने ईद की नमाज अदा कर मुल्क की खुशहाली और अमन चैन की दुआएं मांगी।ईद को लेकर लोगों में खास उत्साह रहा। लोगों ने ईदगाह व मस्जिदों में नमाज अता की और देश की खुशहाली, एकता, भाईचारे और तरक्की की दुआएं मांगी। नमाज अता करने के बाद लोगों ने एक दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाई दी।ईद के अवसर पर घरों में मीठी सेवईयां और कई तरह के पकवानों से मेहमानों का स्वागत किया गया। ईद पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस और प्रशासन की और से सुरक्षा और साफ सफाई के विशेष इंतजाम किए गए थे। ज्वालापुर स्थित ईदगाह में ईद की नमाज अता करने के लिए सुबह से भीड़ जुटनी शुरू हो गयी थी। ईदगाह में मौलाना वाहिद ने नमाज अता करायी। ईद की नमाज अता कराते हुए मौलाना वाहीद ने कहा कि ईद खुशियों का पैगाम देता है। प्यार मोहब्बत के जज्बात आपस में होने चाहिए।नफरत समाप्त कर मुल्क के निजाम को बेहतर बनाएं। सुख, शांति व अमनो चैन से ही देश मजबूत होता है।उन्होंने कहा कि पै...

भारत परंपरांओं का देश है-हाजी नईम कुरैशी

हरिद्वार। पूर्व राज्यमंत्री हाजी नईम कुरैशी ने देश और प्रदेश वासियों को ईद पर्व की बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत परंपराओं का देश है। विभिन्न धर्माे के लोग आपसी भाईचारे को पर्वों के माध्यम से दर्शाते चले आ रहे हैं। एकता भाईचारा सौहार्द ही देश की पहचान है। देश की तरक्की में सभी को मिलजुल कर अपना योगदान देना चाहिए। पूर्व पार्षद इसरार सलमानी ने सभी को ईद की बधाई देते हुए कहा कि त्योहार मिलजुल कर ही मनाने चाहिए।हिंदू मुस्लिम सिख इसाई देश की एकता की पहचान हैं।राष्ट्र को मजबूत करने के लिए एकजुट रहें।इसरार सलमानी ने कहा कि उपनगरी ज्वालापुर में सभी धर्म समुदाय के लोग आपस में मिलजुल कर पर्वों को मानते चले आ रहे हैं।भाईचारे का संदेश हमेशा ही देश दुनिया में पहुंचता है।छम्मा ठेकेदार व नदीम ठेकेदार ने भी सभी को ईद की बधाई और शुभकामनाएं दी। 

माता पिता की सेवा से ही जीवन में सफलता मिलती है-पंडित अधीर कौशिक

हरिद्वार।श्रीअखंड परशुराम अखाड़े के तत्वावधान में श्रीबिल्केश्वर महादेव मंदिर में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने भगवान विष्णु द्वारा मधु कैटभ नामक दैत्यों की उत्पत्ति एवं संहार की कथा का श्रवण कराते हुए बताया कि महाप्रलय के बाद शेष शैय्या पर विश्राम कर रहे भगवान नारायण के कान की मैल से मधु एवं कैटभ नामक दो दैत्यों की उत्पत्ति हुई।मधु कैटभ ने दस हजार वर्षों तक मां भगवती की कठोर साधना की।साधना से प्रसन्न होकर मां भगवती ने मधु कैटभ को उनकी इच्छानुसार वरदान दिया।वरदान पाने के बाद दोनों दैत्य ब्रह्मा को मारने चले। प्राण बचाने के लिए ब्रह्मा भगवान नारायण के पास पहुंचे। भगवान नारायण ने मधु एवं कैटभ के साथ पांच हजार वर्ष तक युद्ध किया।लेकिन उनका वध नहीं कर पाए। तब भगवान नारायण ने स्वयं मां भगवती जगदंबा की स्तुति की,जिससे प्रसन्न होकर मां भगवती ने भगवान नारायण को मधु एवं कैटभ के वध का उपाय बताया। भगवान नारायण ने मां भगवती के कहे अनुसार अपनी जंघा के ऊपर ही दोनों का संहार किया। शास्त्री ने बताया नवरात्रि में नौ दिनों तक मां भगवती की आराधना उपासना क...